‘अनभ्र रात्रि की अनुपमा‘, ‘उत्थिष्ठ भारत‘ एवं ‘यायावर‘ मेरी कविताओं के तीन संग्रह हैं | मेरी कविताओं में आपको कभी देशभक्ति की भावना फूटती नज़र आएगी, तो कभी छोटानागपुर में बसे आदिवासियों के संघर्षमय, स्वप्निल, कर्मप्रधान जीवन के दर्शन होंगे | कुछ कविताओं में समाजवाद दिखेगा तो कुछ कविताएँ विरक्ति एवं विद्रोह के रस में डूबे मिलेंगे | इनमें कभी आपको संवेदनशीलता और श्रृंगार के दर्शन होंगे तो कभी आपको आक्रोश और शोक फूटता दिखेगा | कुछ कविताएँ मोहभग्न करते नज़र आयेंगे, तो कुछ में राजनीती, संस्कृति, प्रेम, वात्सल्य जैसे रसों का भी समागम मिलेगा |
प्रस्तुत हैं मेरी कुछ कविताएँ-

‘यायावर’ से-

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जूते
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संतुलन
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भौतिकी
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जनपथ
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गंवार
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चेहरे
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लोहा
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पहाड़
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सन्नाटा -
स्पर्श
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नील दर्पण
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पागल
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घर
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चीख़
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सिनेमा
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अनिवार्य लड़कियाँ
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इंजीनियर्स मैनिफेस्टो -
गुस्सा
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कलम
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धरती माँ
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फ्लाइ ओवर
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बच्चा
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बिरोधी
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मेरा गाँव
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विद्रोह -
सब्ज़ी वाले
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अर्नेस्टो ‘चे’ ग्वेरा
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खर्राटे
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गेंद
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अंतर्कथा
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यायावर

‘उत्थिष्ठ भारत’ से-

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उत्थिष्ठ भारत
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चिड़ियाघर
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बटन
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भारतवर्ष
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माँ
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राष्ट्रीय साक्षरता मिशन
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सोवियत संघ
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भगत सिंह के शहीद होते ही -
यावर
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ट्रेन की खिड़की से छोटानागपुर
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भारतीय रेल
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संथाल देस
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भ्रातृत्व
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आदिवासी लोग
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आदिवासी स्त्री से…
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ईवोल्यूशन -
नक्सलवादी
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नहीं रहा वो झारखंड
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पूंजीवादी समाज के प्रति
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भागता हूँ
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संयुक्त राष्ट्र संघ
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मजूरनामा
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उड़ान -
एक और सामान्यीकरण
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तमस
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तुम्हारा नाम
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प्रार्थना
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बारिश
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वासना
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विक्रम बेताल
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सुप्रभात -
अकेलेपन का विलाप
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युद्ध
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सूरज डूब चुका है
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कुर्मीडीह
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माओवाद
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आशावादी की चीखें
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डॉक्टर
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एक और दिन
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मेघ नहीं हूँ मैं -
मानचित्र
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सुख दुःख
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बस अड्डे पर आत्मज्ञान
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सैनिक

‘अनभ्र रात्रि की अनुपमा’ से-
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राष्ट्रगान
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चप्पल से लिपटी चाहतें
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क्रमशः
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झारखण्ड
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अभी यहाँ…
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क्रांति कन्या
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जोकर
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गाना गाया
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वो अमसीहा
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एकदम पाग़ल
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किलकारी
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दो रास्ते
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किवाड़
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दो बहनें
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आत्मदाह
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अच्छा बच्चा का कच्छा
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अनुगूंज
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असफलता
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चिता
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करवटों के जोकर
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एक सवाल -
दाढ़ी बना डाला
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हमने कोई क्रांति शुरू नहीं की
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ख़ामोशी
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ख़ुशी
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मंदिर में
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मैं आप वो -
क्योंकर आखिरकर
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सड़क
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बिजली गुल
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बोकारो
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सब चले…
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प्यार करता हूँ
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रतजगे
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पेड़
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नक्शे
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मुकद्दमा -
परदे
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शोकगीत
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मैं
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ज़रा सी देर में
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स्टेशन पर खड़ी लड़की
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क्रांति को
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तानाशाही को -
काँव-काँव
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द्वारका
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विदर्भ
















