कविताएँ

अनभ्र रात्रि की अनुपमा‘ एवं ‘उत्थिष्ठ भारत‘ मेरी कविताओं के दो संग्रह हैं | मेरी कविताओं में आपको कभी देशभक्ति की भावना फूटती नज़र आएगी, तो कभी छोटानागपुर में बसे आदिवासियों के संघर्षमय, स्वप्निल, कर्मप्रधान जीवन के दर्शन होंगे | कुछ कविताओं में समाजवाद दिखेगा तो कुछ कविताएँ विरक्ति एवं विद्रोह के रस में डूबे मिलेंगे | इनमें कभी आपको संवेदनशीलता और श्रृंगार के दर्शन होंगे तो कभी आपको आक्रोश और शोक फूटता दिखेगा | कुछ कविताएँ मोहभग्न करते नज़र आयेंगे, तो कुछ में राजनीती, संस्कृति, प्रेम, वात्सल्य जैसे रसों का भी समागम मिलेगा |

प्रस्तुत हैं मेरी कुछ कविताएँ-

उत्थिष्ठ भारत

भारतवर्ष

चिड़ियाघर

राष्ट्रगान

चप्पल से लिपटी चाहतें

माँ

क्रमशः

झारखण्ड

अभी यहाँ…

क्रांति कन्या

बटन

जोकर

गाना गाया

वो अमसीहा

एकदम पाग़ल

किलकारी

दो रास्ते

किवाड़

दो बहनें

आत्मदाह

अच्छा बच्चा का कच्छा

अनुगूंज

असफलता

चिता

करवटों के जोकर

एक सवाल

दाढ़ी बना डाला

हमने कोई क्रांति शुरू नहीं की

ख़ामोशी

ख़ुशी

मंदिर में

मैं आप वो

क्योंकर आखिरकर

सड़क

बिजली गुल

बोकारो

सब चले…

प्यार करता हूँ

रतजगे

पेड़

नक्शे

मुकद्दमा

परदे

शोकगीत

मैं

ज़रा सी देर में

स्टेशन पर खड़ी लड़की

क्रांति को

तानाशाही को

काँव-काँव

द्वारका

विदर्भ