चिड़ियाघर

एक रोज़ चिड़ियाघर में मचा बवाल
जानवरों ने किया हड़ताल, कहा – करो हमें स्वतंत्र
निकाल फेंका चिड़ियाघर के सभी अफसरों को
संस्थापित किया लोकतंत्र

मतदान हुआ चिड़ियाघर में
सारे जानवरों ने प्यास बुझाई
मदमस्त होकर नाचती गाती
विजयी पार्टी सत्ता में आई ।

दार्शनिक सी सूरत समेट साँप हुए राष्ट्रपति
गधे के पीठ पड़ा प्रधानमन्त्री का भार
रोजगार विभाग खाली छोड़कर
खड़ी हो गई सरकार

बिल्ली बनी होम मिनिस्टर
शिक्षा प्रसार भैंस ने संभाला
शान्ति कायम रखने आया
गली का झबरा कुत्ता काला ।

सूचना प्रसारण की मीनार पर
चिमगादड़ उलटा लटका रहा
भेड़ संभाले उद्यमिता
“खेत उगाओ !” – कौवों ने कहा

भालू बना खेलमंत्री
रेल लेकर कछुआ दौड़ा
रक्षा मंत्रालय मेरा कहकर
मुर्गी ने किया सीना चौड़ा

कोयल करे बाल-विकास
मक्खी ने संभाली साफ सफाई
कला संस्कृति नोच नोचकर
भेड़िये सियार करें लड़ाई ।

उल्लू लाएगा घर-घर बिजली
सुन उसकी आँखें घूमी गोल गोल
विदेश मंत्रालय उसका जानकार
सूअर नाचने लगा कपड़े खोल ।

गलती जानवरों की नहीं थी
गलत थी चिड़ियाघर की जनता
जो आंक न सकी
अपने प्रतिरोध की क्षमता

बच्चो, तुमने स्कूल में पढ़ा होगा –
यथा राजा – तथा प्रजा
सुन लो लोकतंत्र का नया मंत्र भी आज –
यथा प्रजा – तथा राजा ।

– सौरभ राय
(प्रकाश रमण की कविता बुझौवल से प्रेरित)

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