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हिंदी में एक कहावत है – “कोस कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी।” हम इस बात को अक्सर बड़े गर्व से कहते हैं, मगर क्या हर चार कोस में भाषा का बदलना हमारे पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं? क्या यह नहीं दर्शाता कि भारत की एक बहुत बड़ी जनसँख्या अपने चार कोस की सीमा…
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1967 में मार्टिन लुथर किंग जूनियर ने वियतनाम के कवि और बौद्ध भिक्षु थिक नात हान को नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित करते हुए कहा था – “मैं किसी दूसरे ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता जो इस पुरस्कार के इतना योग्य है। वियतनाम के इस शान्तिदूत की बातों पर अगर ग़ौर किया गया तो विश्व…
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‘मोक्षधरा’ सुधीर रंजन सिंह का दूसरा काव्य संग्रह है। इनके पहले और दूसरे संग्रह के बीच दो दशकों की लम्बी समयावधि, जहाँ एक तरफ कवि की परिपक्वता से हमें आश्वासित करती है, वहीं दूसरी तरफ कवि की अपनी ज़मीन को धैर्यपूर्वक तलाशने के प्रति प्रतिबद्धता की ओर भी इशारा करती है। इसी बीच उन्होंने भर्तृहरि के…
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सिंगापुर के चर्चित कवि एल्विन पैंग से मैं दिसंबर 2014 में चेन्नई प्रवास के दौरान मिला था। यहीं मैंने इनके साथ एक मंच पर छात्रों के बीच अपनी कविताएँ पढ़ीं, इनकी शांत गंभीर आवाज़ में इन कविताओं का अनुभव किया, और अगले कुछ दिनों तक इन्हें पढ़ता रहा। पैंग की कविताओं से गुज़रना बरसात के…
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स्कूल के दिनों में ‘राष्ट्रगान‘ नाम की एक कविता लिखी थी। हालाँकि jargon में लिखी गई यह कविता काफी एमेच्यूर थी और शायद इसी वजह से कुछ मित्रों के बीच विवादित भी रही, लेकिन इस कविता की कुछ पंक्तियाँ केवल सन्दर्भ स्थापित करने के उद्देश्य से साझा करने की इजाज़त चाहूँगा – जहां मिट्टी के कीड़े, मिट्टी…
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राजकमल चौधरी ने ‘मुक्ति-प्रसंग’ के बारे में लिखा है – ‘मैंने अनुभव किया है, स्वयं को और अपने अहं को मुक्त किया जा सकता है।… इस अनुभव के साथ ही, दो समानधर्मा शब्द – जिजीविषा और मुमुक्षा – इस कविता के मूलगत कारण है।’ चीनी कवि शी लिजी की कविताओं को पढ़कर भी कुछ ऐसा…
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लेखक पेरूमल मुरुगन के खुदको मृत घोषित करने के एक वर्ष के भीतर पंसारे और कलबुर्गी जैसे रेशनलिस्ट हमारे देश में बढ़ रही फासिस्ट ताकतों के हाथ मारे गए। विरोध का दमन हमारे देश में कई सालों से होता आया है। वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ के अनुसार ग्रामीण भारत में अपने हक के आवाज़ उठाना…
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कोबायाशी इस्सा (1763 – 1828), जिन्हें इस्सा के नाम से भी जाना जाता है, जापानी हाइकू के चार स्तम्भों में गिने जाते हैं, जिनमें इनके अलावा मात्सुओ बाशो, योसा बुसोन और मासाओका शिकि भी शामिल हैं। जापान में इस्सा हाइकू के जन्मदाता माने जाने वाले बाशो जितने ही लोकप्रिय हैं। बाशो से एक शताब्दी बाद जन्मे इस्सा को हाइकू की रूढ़िवादी प्रथा का विधर्मी माना गया…
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Full text of my speech delivered on 21st March, 2015, in a session organized by Progressive Writers and Artists Association at Freedom Park, Bangalore. Thank you India Resists for publishing this. Please click here to read further.
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A nuclear meltdown is quite common in ‘The Simpsons’, the popular television show which chronicles the human condition in modern America using satire and humour. The show is set in the fictional small town of Springfield, known for its nuclear power plant.