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  • उत्तर सत्य युग में गांधी

    ‘हिन्द स्वराज’ में गांधी ने सबसे पहली बात अखबारों की भूमिका पर की है। 1909 में लिखे गए इस मैनिफेस्टो में एक कल्पित संपादक और पाठक के बीच की बातचीत है, जिसमें संपादक अपनी दूसरी पंक्ति में ही कहता है – “अखबार का एक काम तो है लोगों की भावनाएँ जानना और उन्हें ज़ाहिर करना;…

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  • Poetry Podcast

    During the 2020 Covid lockdown, I had made a poetry podcast (53 episodes) discussing my favourite poems and their poetics. The episodes are mostly in Hindi and English, with poems in other languages covered, including Japanese, Kannada, Sanskrit, Bangla, Portuguese, and Maithili. The podcast is available on Youtube here.

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  • श्रीमती कमला सकलेचा ज्ञान मंदिर मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में स्थित है। साल 2016 में इस स्कूल में मेरा तीसरा प्रवास पूरा हुआ। आईआईटी की तैयारी के लिए मशहूर कोटा शहर से डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित होने के बावजूद चम्बल नदी के किनारे बसा भानपुरा और आस पास के गाँव…

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  • योसा बुसोन (1716-1783) को जापानी हाइकु के चार स्तंभों में गिना गया है। जापान में बुसोन से बड़े कवि एकमात्र मात्सुओ बाशो (1644-1694) ही हैं। बाशो को जापान के महानतम कवि के रूप में स्थापित करने में बुसोन और इनके साथियों की बड़ी भूमिका थी। कवि के अलावा बुसोन एक विलक्षण चित्रकार और खुशनवीस भी…

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  • डुबुक!

    जापान के प्रसिद्द कवि मात्सुओ बाशो (1644-1694) ने साल 1686 में अपनी सबसे प्रसिद्द कविता ‘पुराना तालाब’ की रचना की थी। कविता की रचना-प्रक्रिया को याद करते हुए इनके शिष्य शिको ने लिखा है, “यह कविता वसंतकाल में लिखी गई थी। हमारे गुरु आँगन में बैठकर हलकी बारिश के बीच कबूतरों की आवाजें सुन रहे…

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  • वे कह सकते हैं कि भाषा की ज़रुरत नहीं होती साहस की होती है फिर भी बिना बतलाये कि एक मामूली व्यक्ति एकाएक कितना विशाल हो जाता है कि बड़े-बड़े लोग उसे मारने पर तुल जायें रहा नहीं जा सकता – रघुवीर सहाय, दो अर्थों का भय’ कविता से जर्मन दार्शनिक लुडविग विट्गेंस्टाइन के मुताबिक…

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  • The battles remain the same – why Bhagat Singh matters today more than ever

    Understanding Bhagat Singh and his ideas, and why they matter today more than ever. Continue reading →

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  • कुछ दिन पहले मथुरा में स्वामी बालेन्दु द्वारा आयोजित नास्तिकों के एक सम्मेलन के निरस्त कर दिए जाने की ख़बर सामने आई। सम्मलेन के विरोध में संत, महंत, और इमाम एकजुट होकर खड़े हो गए। मथुरा में धार्मिक गुटों का उन्माद और आक्रोश देखकर जनपद में धारा 144 लगाने का निर्देश पारित किया गया। विवाद…

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  • साहित्य और लेखन पर कुछ विचार. Continue reading →

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