Category Archives: Philosophy

The battles remain the same – why Bhagat Singh matters today more than ever

History is a complicated subject. Predicting what happened in the past is as difficult as predicting the future. In the general populace, history is seen as stories of times we have never been to; times we know existed because of its legacies. Yet history, no matter how much we claim to have learned from it, almost always repeats itself. Bhagat Singh is probably one of the most loved and yet controversial figures in India’s history. Continue reading

ईश्वरीय सत्ता को चुनौती और भारतीय परंपरा

कुछ दिन पहले मथुरा में स्वामी बालेन्दु द्वारा आयोजित नास्तिकों के एक सम्मेलन के निरस्त कर दिए जाने की ख़बर सामने आई। सम्मलेन के विरोध में संत, महंत, और इमाम एकजुट होकर खड़े हो गए। मथुरा में धार्मिक गुटों का उन्माद और आक्रोश देखकर जनपद में धारा 144 लगाने का निर्देश पारित किया गया। विवाद से पहले स्वामी बालेन्दु ने एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिये सम्मलेन के आयोजन का उद्येश्य स्पष्ट किया था जिसमें उन्होंने समाज में धर्म के नाम पर फैले अधंविश्वास और पाखंड को दूर करने के लिए शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के आधार पर भविष्य को गढ़ने की इच्छा जताई थी। आयोजन के रद्द कर दिए जाने के बाद उन्होंने फेसबुक पर लिखाContinue reading

कवि का मोक्ष कविता है

sudhir-ranjan-singh‘मोक्षधरा’ सुधीर रंजन सिंह का दूसरा काव्य संग्रह है। इनके पहले और दूसरे संग्रह के बीच दो दशकों की लम्बी समयावधि, जहाँ एक तरफ कवि की परिपक्वता से हमें आश्वासित करती है, वहीं दूसरी तरफ कवि की अपनी ज़मीन को धैर्यपूर्वक तलाशने के प्रति प्रतिबद्धता की ओर भी इशारा करती है। इसी बीच उन्होंने भर्तृहरि के काव्य श्लोकों की अनुरचना का महत्वपूर्ण काम किया है। ‘मोक्षधरा’ की कविताओं में भी वह झलकता है। वही सघन जीवन-बोध जिसमें राग और विराग समान अनुभव के दो छोर हैं। कवि कभी चिड़िया में सूर्योदय को दुबका हुआ देखता है, तो कभी लोगों का अपनी-अपनी बसों में घुसना अपने घरों में घुसने की तरह देखता है। Continue reading

Why Bhagat Singh matters

bhagat_singhFull text of my speech delivered on 21st March, 2015, in a session organized by Progressive Writers and Artists Association at Freedom Park, Bangalore. Thank you India Resists for publishing this. Please click here to read further.

A programmer’s null and a philosopher’s nihilism

null_nihilBeing software engineers, we use null as a value that is unavailable, unassigned, unknown, or inapplicable. It is neither a zero nor a blank space. A database designer uses a null to indicate a data value that does not exist in the database. A programmer uses a null pointer for an uninitialized, undefined, empty or meaningless value. It is believed that a null reference is probably the worst mistake made in programming. I will argue otherwise. Continue reading