शादी का फोटोग्राफर

पियाली के लिए

उसकी लेन्स जिधर घूमती है
ऊंघते लोग भी मुस्कुरा देते हैं
मंत्र पढ़ता पंडित बोल पड़ता है जोर जोर से
दूल्हा दुल्हन मौसा मौसी काका और बच्चे
चौकन्ने होकर करते हैं कोशिश सामान्य दिखने की

कोई धीरे से फुसफुसाता है – “वो समय का जासूस
बीते समय के प्रमाण जेब में लिए फिरता है”
थोड़ी देर तक तैरती हैं आँखें
और समय को पलक झपकते
किसी भागते चोर की तरह
वो दबोच लेता है

लोग सोचते हैं – मैं ज़्यादा तो नहीं मुस्कुराया ?
आँखें बंद तो नहीं थी ?
(भूत का डर जन्म लेता है यहीं से!)

समय से नाख़ुश
वो हर नयी तस्वीर को देख बड़बड़ाता है
कर्वेचर एक्सपोज़र टीन्ट को गालियां देता है
अलग अलग कोण से किसी की गरदन दाएँ
बच्चों को शांत, औरतों को आगे
तीन सौ साठ डिग्री के विचार को पांच बाई सात इंच में समेटने का करता है
बेहद महत्वपूर्ण काम

बिदाई के वक़्त भी अलग-थलग सा रहता है
पिता के अँधेरे में तेज़ रोशनी…
रोती माँ के झरते आंसुओं को लपक कर खुश होता है
कैमरा रोता है, लोग रोते हैं
दूल्हा दुल्हन मौसा मौसी काका और बच्चे रोते हैं;
उसे मालूम है कि बेटी के जाने के बाद घर एक खाली नेगेटिव होता है
मगर वो केवल स्मृतियाँ संजोता है
लगभग अनुपस्थित निराकार
वो उन क्षणों को आकार देता है जो सदियों तक सबको हँसाती रहेंगी

चुपचाप, दबे पाँव
भविष्य में जन्म ले रहे विषाद से झांकता
वो अचानक कहता है –
“स्माइल प्लीज़!”

– सौरभ राय