मरकस बाबा की यूटोपिया 

यहाँ दुनिया की तमाम बंदूकें
गोली चलते ही
नकली निकलती हैं

यहाँ के पत्थर
फेंकने पर बन जाते हैं
फूल

यहाँ चाक़ू छुरे
सब्जी काटने के बाद
गायब हो जाते हैं हाथों से

यहाँ बम डिटोनेट करते ही
बटन दबाने वाले को लगता है
करंट का हल्का झटका

यहाँ मिथक हैं
यथार्थ है, और फैन्टसी भी है
जो मिलजुलकर साथ रहते हैं

यहाँ स्मृतियों में बारूद नहीं है
कोई किसी की पहचान नहीं पूछता
घर लौटकर सब प्रेम करते हैं

यहाँ सब अपनी मर्ज़ी से
मरते हैं ।

– सौरभ राय