भर्तृहरि : पाँच प्रेम कविताएँ

1.

भरे वक्ष
नैन ठगे गठीला
यौवन तेरा

2.

खुलती आँखें –
देखो नीलकमल
मन में खिला

3.

अलसाई सी
सुबह, सपनों को
जैसे सहेजे

4.

वैरागी मन
जैसे जंगल में
उदास हिरन

5.

अमर फल
हथेली से हथेली
फिसलता जाता

– सौरभ राय

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