आत्मदया

सड़क पर पड़ा प्लास्टिक
मरी चिड़िया सा दिखलाई पड़ा
बहुत देर तक प्लास्टिक पर मुझे
दया आती रही

तालाब में नहाती चिड़िया
बादल सी दिखलाई पड़ी
बहुत देर तक चिड़िया के नीचे
मैं खड़ा भीगता रहा

धीरे धीरे खिसकता बादल
आकाश सा जान पड़ा
अपने सिमटते क्षितिज पर
मुझे रोना आया ।

– सौरभ राय