मुझे घड़ी के अलार्म पर उठाना है
कुकर की सीटी का इंतज़ार करना है
और अपनी मौत पर मर जाना है |
मुझे बिना शहीद हुए भी मरना आता है !
सवाल ये नहीं है
परन्तु जवाब है-
‘मुझे क्या करना आता है?’
-Sourav Roy “Bhagirath”
मुझे घड़ी के अलार्म पर उठाना है
कुकर की सीटी का इंतज़ार करना है
और अपनी मौत पर मर जाना है |
मुझे बिना शहीद हुए भी मरना आता है !
सवाल ये नहीं है
परन्तु जवाब है-
‘मुझे क्या करना आता है?’
-Sourav Roy “Bhagirath”
बढ़िया कविता.
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nice poems sourav.