चाहता हूँ
एक पुरानी डायरी
कविता लिखने के लिए
एक कोरा काग़ज़
चित्र बनाने के लिए
एक शांत कोना
पृथ्वी का
गुनगुनाने के लिए |
चाहता हूँ
नीली – कत्थई नक्शे से निकल
हरी ज़मीन पर रहूँ |
चाहता हूँ
भीतर के वेताल को
निकाल फेकूं |
खरीदना है मुझे
मोल भाव करके
आलू प्याज़ बैंगन
अर्थशास्त्र पढ़ने से पहले |
चाहता हूँ कई अनंत यात्राओं को
पूरा करना |
बादल को सूखने से बचाना चाहता हूँ |
गेहूं को भूख से बचाना चाहता हूँ
और कपास को नंगा होने से |
रोटी कपड़े और मकान को
स्पंज बनने से बचाना चाहता हूँ |
इन अनथकी यात्राओं के बीच
मुझे कीचड़ से निकलकर
जाना है नौकरी मांगने…||
-Sourav Roy “Bhgirath”













अच्छी कविता है। हिन्दी में और भी लिखिये।
Pleasure reading indeed.
Jhakjhorne waala ant!
बादल को सूखने से बचाना चाहता हूँ |
गेहूं को भूख से बचाना चाहता हूँ
waah !
bahut badhiya!
alpz2009.wordpress.com
खरीदना है मुझे
मोल भाव करके
आलू प्याज़ बैंगन
अर्थशास्त्र पढ़ने से पहले |
superb…bahut khoob
keep up the good work
चाहता हूँ
एक पुरानी डायरी
कविता लिखने के लिए
एक कोरा काग़ज़
चित्र बनाने के लिए
एक शांत कोना
पृथ्वी का
गुनगुनाने के लिए |
……शरीर और आत्मा की चाहतों का अद्भुद अंतर्द्वंद्व … सुन्दर रचना … बधाई
गेहूं को भूख से बचाना चाहता हूँ
और कपास को नंगा होने से .nice
Very well written
अच्छी कविताएँ. अभिव्यक्ति की बेचैनी से भरी. बादल को सूखने से बचाने की कोशिश !बधाई!!