एक प्रतियोगिता है
निर्लज्ज की तरह
रुके खड़े रहने
खड़े खड़े गिरने
और फिर
कतार तोड़कर
पहले मरने की|
यही नया दौर है…
असफलता का|
वैसे भी
नंगा नहाता है जो
कुछ नहीं निचोड़ता
कुछ नहीं सुखाता|
-Sourav Roy “Bhagirath”
एक प्रतियोगिता है
निर्लज्ज की तरह
रुके खड़े रहने
खड़े खड़े गिरने
और फिर
कतार तोड़कर
पहले मरने की|
यही नया दौर है…
असफलता का|
वैसे भी
नंगा नहाता है जो
कुछ नहीं निचोड़ता
कुछ नहीं सुखाता|
-Sourav Roy “Bhagirath”