स्टेशन पर खड़ी लड़की
मेरी क्या लगती थी ?
फिर भी क्यों सोचने लगा
उसके बारे में
क्यों अच्छा दिखना चाहा
क्यों लिखी ये कविता ?
दो ट्रेन के बीच का इंतज़ार
कितना लम्बा होता है
अगर साथ अच्छी किताब न हो
मोबाइल में पैसे न हो
पर वो लड़की
बिलकुल मामूली सी
मुझे देखती
झपट ली नज़र वापस उसने
जैसे ही मेरी नज़र पड़ी
उसे देखता मैं रह रह कर
वो देखती रही पूरे स्टेशन को
मुझे छोड़कर ||
-Sourav Roy “Bhagirath”












