ज्योंही सूखता है पक्षियों का गला
काट दो उसको
भर जाने दो खून से
लबालब |
निकाल दो भ्रूण को
हर माँ की कोख से
उजाड़ दो सारा
संसार |
काट डालो पेड़ पर पेड़
कर दो धरती को
अपनी माँ को
नंगा |
मुचड़ दो फूलों को
बच्चे की हाथ से छीन कर
पकड़ा दो
बन्दूक |
खोद दो गड्ढे
जगहों पर
रोप दो उनमें
बारूद |
घेर लो खुदको
काँटों की बेड़ियों से
बन जाओ एक और
देश |
यही होना है
यही कर रहे हो
जल्दी करो
ख़त्म करो !
-Sourav Roy “Bhagirath”












