तुम्हे पता है ?
कि अगर एक दूसरे के कंधे पर चढ़ जाओ
तो छीन सकते हो
आकाश से चाँद !
तुम्ही हो
जो आग में तपने से नहीं डरते
नहीं डरते
रण में शहीद होने से
तुम्ही भगत सिंह हो
तुम्ही आज़ाद !
तो क्यों खप रहे हो
गलत क्रांति में
क्यों जी रहे हो
कमीज़ से टूटे हुए
बटन का जीवन ?
तुम्हे फेंक दिया जाना है
या फिर टांक दिया जाना
उसी गोल फंदे में घुटने को |
क्या तुम
बटन से
पहिये में बदल
दौड़ नहीं सकते ?
-Sourav Roy “Bhagirath”












