नहीं उलटता कोई सरकारों को
राजनीति ख़ुद-ब-ख़ुद
आत्मघात करती है |
प्रजा को क्या चाहिए ?
सुख
सांस
पानी !
राजा
हिटलर या तैमूर
क्या फ़र्क पड़ता है ?
पर जितनी बार
ज़ार आतंक फैलाओगे
डायर गोली चलवाओगे
मुसोलीनी खून बहाओगे
नीरो रोम जलाओगे
याह्या सर उठाओगे
उतनी ही बार
रक्त में मथनी डाल कर
होगा मंथन विचारों का
आसमान से गिरेगा ताबूत
धरती फटेगी ख़ुद-ब-ख़ुद
और आंधी उड़ा ले आएगी मिट्टी
तुम्हारा देश धम्म से गिरेगा
और कुचल देगा तुम्हे !!
-Sourav Roy “Bhagirath”













bahot hi sundar..