ज़रा सी देर में
बड़ा हो गया
गाँव से निकल कर
शहरी हो गया
टूट गया हाथ
हार गया बॉक्सिंग का मैच |
ज़रा सी देर में
बरामदे का पौधा
पेड़ बन गया
और उसके फलों को निचोड़
शरबत पीया
सबने मिलकर |
ज़रा सी देर में
स्कूल छूट गया
दोस्त छूट गए
फेल कर गया
आई आई टी का
एक्ज़ाम |
ज़रा सी देर में
मैं स्कूल गया
और एक
डरावना सपना टूटा
लटका रहा मेरा भाई
फांसी के तख्ते पर |
ज़रा सी देर में
प्यार हो गया
एक लड़की की हंसी में
सारा संसार पाया
एक और रात बीती
एक और सवेरा आया ||
-Sourav Roy “Bhagirath”













ज़रा सी देर में क्या न हो जाता है।
सराहनीय प्रयास