“अनभ्र रात्रि की अनुपमा” (meaning gift of the cloudless night, 2009, ISBN- 978-81-8465-835-4), मेरी कविताओं का पहला संग्रह है ।
मेरी कविता यात्रा तब शुरू हुई जब मैं महज़ आठ साल का था | विकास विद्यालय में दाखिले के पश्चात मेरी मुलाकात डॉ. दिवाकर दुबे और बुद्धिराम मिश्र सरीखे महान कवियों से हुई | सौभाग्यवश ये ही मेरे शिक्षक भी रहे | मेरी हिंदी तब सुधरी जब डॉ. दिवाकर दुबे के पुत्र ‘कृष्ण कुणाल’ और मेरे परम मित्र ‘रोहित अगरवाल’ के सुझाव पर मैं पाठ्य पुस्तकों के पूछे गए सवालों का जवाब अलग अलग संस्कृत एवं उर्दू में लिखने लगा |
मेरी शुरुवाती कविताओं में कभी संवेदनशीलता और श्रृंगार के दर्शन हुए तो कभी आक्रोश और शोक फूट पड़ा | कुछ वर्षों में कविताएँ कभी मेरा मोहभग्न करते नज़र आये तो कभी आत्मघाती वृत्ति के दिखे | आज शायद ये याद करना मूर्खता होगी कि किन भावों के वशीभूत कौन सी कविता किस रूप में फूटी थी | कविता मेरी प्रवृति हो गयी थी और एक भरे पूरे समाज में रहकर भी मैं हर दिक् से कविताएँ निकलते देखता था | ये अपनी कविताएँ मैं कुछ मुट्ठी भर दोस्तों को सुनाता था और इस समूह के बाहर के कई लोग मुझे पागल समझ बैठे | मेरी कविताएँ कभी किसी समीक्षा की मोहताज नहीं रहीं परन्तु आप पाठकों की आलोचनाओं को मैं आज भी अपनी कविताओं की बेहतरी में लगाता हूँ |
सन् 2007 के पश्चात मैं अपने विचारों और लेखन कला के साथ अनेकानेक प्रयोग करने लगा | रचना क्रम के दौर से गुज़रते हुए मैंने रूढ़ी और चेतना दोनों भावों से खेलना सीखा |
जैसा की मैंने हमेशा माना, मेरी कविताएँ कम प्रतिभावाले मूर्ख आलोचकों के लिए नहीं है | मेरी कविताएँ मैं-तुम से परे है | एक तीसरे तत्व को तलाशती इस आदर्शवादी कवि की चीखों से अगर आपके विचारों में उथल पुथल मचती है और इस रक्तचाप से अगर किसी का जीवन सुधरता है तो मुझे ख़ुशी होगी |
इस संग्रह की कीमत 200 रुपये है । इसकी साइन की हुई प्रति प्राप्त करने के लिए संपर्क करें ।
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